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Palmistry Article Posted On : 12-02-2015
 

हथेली में सूर्य रेखा

भाग्य जानने की अनेक विधाएं हैं। उनमें प्रमुख रूप से ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु इत्यादि शामिल हैं। अपने भाग्य के बारे में जानने की जिज्ञासा हर इन्सान को होती है। इसी क्रम में बिना किसी अतिरिक्तसंसाधन के इन्सान अपनी हथेली में स्थित रेखाओं पर ब़डा विश्वास करता है। जीवन से जु़डे रहस्यों से पर्दा उठाने में हाथ की हथेली में स्थित रेखाएं / चिन्ह ब़डा योगदान देते हैं। इसी क्रम में मैं इस लेख में सूर्य की स्थिति का विवेचन करना चाहूंगा। हथेली में अनामिका अंगुली की ज़ड में सूर्य की स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है जिसे सामुद्रिक शास्त्र में सूर्य पर्वत के नाम से जाना जाता है। जिस प्रकार अन्य पर्वत क्षेत्रों पर विभिन्न रेखाएं होती हैं उसी प्रकार सूर्य पर्वत क्षेत्र पर भी रेखाएं होती हैं। पर्वत की स्थिति का महत्व शुभता व अशुभता के दृष्टिकोण से बहुत मायने रखता है। इसमें एक तथ्य यह भी उभर कर आता है कि पर्वत की स्थिति कितनी भी सुदृढ़ क्यों ना हो उस पर स्थित रेखाएं उसके मायने बदल देती हैं अर्थात् पर्वत पर स्थित रेखाएं परिणामों में कमी व वृद्धि को दर्शाती हैं। रेखाओं की शुभता व अशुभता का प्रभाव पर्वत पर प़डता है। कोई भी पर्वत इससे अछूता नहीं रह सकता। ये रेखाएं कभी-कभी पर्वत के विशिष्ट फल को नष्ट कर देती हंै तथा दूसरी ओर शुभ रेखाएं पर्वत के गुणों में बेतहाशा वृद्धि करती है। इन पर्वतों पर कुछ रेखाएं विशिष्ट होती हैं जिन्हें विशिष्टनाम दिया जाता है। यदि सच पूछा जाए तो इन विशिष्ट रेखाओं का प्रभाव इतना व्यापक होता है कि कभी-कभी ब़डे से ब़डे फलों में आकाश से पाताल का परिवर्तन कर देती हैं। सूर्य पर्वत क्षेत्र पर भी इसी प्रकार की एक रेखा पाई जाती है। इस रेखा को सूर्य रेखा कहते हैं। सूर्य रेखा को रवि, आदित्य, भास्कर व मार्तण्ड आदि नामों से भी जाना जाता है। ये नाम शाब्दिक रूप में सूर्य के पर्याय ही हंै। इसके विपरीत इस रेखा के कुछेक नाम ऎसे भी हैं जो सूर्य के नामों से सर्वथा भिन्न हैं और वे इस रेखा के गुणों के ही प्रतीक हैं। इस रेखा के नामों के परिप्रेक्ष्य में एक नाम तेजस्वी रेखा भी उभर कर आया है। जैसाकि तेजस्वी नाम से प्रतीत होता है वही इस रेखा वाले जातक में गुण विद्यमान होने चाहिएं तब इस रेखा की सार्थकता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह रेखा विद्यमान होती है उसके उ”वल भविष्य का प्रकाश प्रखर होकर उसके जीवन को प्रकाशित करता है। यदि भाग्य रेखा उस जातक की अच्छी नहीं है तो सूर्य रेखा का पूरा फल मिलने में संदेह होता है और यदि संयोगवश भाग्यरेखा भी अच्छी स्थिति में हो तो उस व्यक्ति का भविष्य इस प्रकार प्रकाशित होगा जैसे भोर होने पर अमावस्या की काली रात्रि का अंत हो जाता है और एक प्रकाशमान सूर्य का उद्गम सारे अंधकार को नष्ट कर देगा, उसी भांति जातक के जीवन में कष्टों का अंत होकर नई चमक उसकी जिन्दगी में प्रकाशित होने की सूचना का द्योतक रूप तेजस्वी रेखा होगी। यहाँ कहने का अभिप्राय: यह है कि तेजस्वी रेखा भाग्य रेखा के गुणों में वृद्धि के रूप में कार्य करेगी। इस रेखा का एक और नाम है वह है प्रतिभा रेखा। जैसाकि प्रतिभा नाम से विदित है कि जिस जातक के हाथ में यह रेखा होगी वह प्रतिभावान अवश्य होगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि किसी व्यक्ति के हाथ में भाग्य रेखा निर्बल हो या भाग्य रेखा का अभाव हो तथा प्रतिभा रेखा सुस्पष्ट एवं शुद्ध हो तो उस व्यक्ति को पूर्ण सौभाग्य चाहे मिले ना मिले परंतु वह व्यक्ति प्रतिभा संपन्न अवश्य होगा। जनसाधारण में उसे यथेष्ट मान-सम्मान तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होगी और वह व्यक्ति जनता का नेतृत्व कर पाने में सफल होगा। सारगर्भित तथ्य यह है कि प्रतिभा रेखा वाला व्यक्ति किसी विषय में ज्ञानवान भले ही कम हो परंतु उस अल्प ज्ञान को प्रकाशित करने में वह ज्ञानी को भी पीछे छो़ड सकता है। ऎसे में वह व्यक्ति अपने अल्प ज्ञान को भी गंभीर रूप से यानि प्रस्तुत करने में सफल रहता है। सूर्य रेखा के इस विलक्षण प्रभाव के कारण ही हस्त विज्ञान के आचार्यो ने इस रेखा का नाम प्रतिभा रेखा रखा या इसे प्रतिभा रेखा के नाम से संबोधित किया। इसके अतिरिक्त सूर्य रेखा की खासियत यह है कि इस रेखा का आरंभ व्यक्ति के जीवन में जब से होना शुरू होता है, उसी समय से इस रेखा के गुणों की शुरूआत जातक के जीवन में हो जाती है। जैसे-जैसे यह रेखा वृद्धि करती है शनै: शनै व्यक्ति का जीवन विकासोन्मुखी होकर प्रतिभा संपन्नता की ओर अग्रसर होता है। सूर्य रेखा का उद्गम : सूर्य रेखा अपने विविध गुणों के अनुरूप व्यक्ति की हथेली पर भिन्न-भिन्न स्थानों से प्रारम्भ होती है। हस्त रेखा के विद्वानों ने सूर्य रेखा का प्रारंभ मणिबन्ध रेखा या उसके आसपास से, चंद्र पर्वत के आसपास से, जीवन रेखा से, भाग्य रेखा से, मंगल क्षेत्र से, मस्तिष्क रेखा से एवं ह्वदय रेखा से माना है। यहां मैं मणिबंध एवं चंद्र क्षेत्र से सूर्य रेखा के उद्गम की चर्चा करूंगा। जब सूर्य रेखा का आरंभ मणिबन्ध रेखा या इसके आसपास के क्षेत्र से होता है तो यह रेखा अपना विशिष्ट स्थान रखती है। इस रेखा का यहां से प्रारंभ होना अति उत्तम माना गया है। इस स्थान से उद्गम के साथ-साथ यदि भाग्य रेखा भी शुद्ध एवं निर्दोष हो तो उस व्यक्ति के भाग्य का वर्णन करना मुश्किल होता है। प्रतिभा और भाग्य का अद्वितीय संगम उस व्यक्ति में देखने को मिलता है। वह व्यक्ति जिस कार्य में हाथ डालता है वह कार्य बिना प्रयास या ये कहें कि कम प्रयास के ही सिद्ध हो जाता है। ऎसे लक्षण वाले व्यक्ति से दु:ख कोसों दूर चले जाते हैं। उस व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के लौकिक सुख प्राप्त होते हैं। व्यक्ति जीवन में ऎश्वर्य व वैभव तथा अच्छे वाहन व बन्धु-बांधव तथा मित्रों का सुख प्राप्त करता है। ऎसे व्यक्ति को हर जगह मान-सम्मान मिलता है तथा उस व्यक्ति की कीर्ति अनायास ही बढ़ती रहती है। दैनिक जीवन में वह मान-सम्मान तथा प्रतिष्ठा के साथ जीवनयापन करता है। शासन सत्ता की ओर से भी ऎसे व्यक्ति को प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है। यदि ऎसा व्यक्ति सार्वजनिक क्षेत्र को अपना कार्य क्षेत्र चुने तो वह उच्चाकोटि का जनप्रिय नेता बनता है। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि ऎसा व्यक्ति जिस किसी आन्दोलन को हाथ में लेता है वह उसमें सफलता पाता है। ऎसे में उसके सहयोगी उसे रास्ता दिखाने वाला अथवा पथ-प्रदर्शक के रूप में देखना पसंद करते हैं। साथ ही उसके कार्यो की सराहना करते हैं व उसका लोहा मानते हैं। ऎसा व्यक्ति अपने उद्देश्यों में आशा के अनुरूप सफलता प्राप्त करता है तथा सत्ता के सर्वोच्च पद पर स्थापित होने का अधिकार रखता है। यहाँ यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि व्यक्ति ने क्या कार्य या क्षेत्र चुना, यदि कोई व्यक्ति राजनीतिक क्षेत्र चुने ही नहीं तो कैसे परिणाम आयेंगेक् ऎसी स्थिति में यदि वह राजनीतिक परिवेश त्यागता है और अन्य कोई भी परिवेश ग्रहण करता है तो वह व्यक्ति उसमें भी सफलता प्राप्त करेगा। जैसे कि वह व्यक्ति अपने व्यापारिक प्रतिद्धंद्धियों को पीछे छो़डता हुआ स्वयं बहुत आगे बढ़ जायेगा और व्यापार के क्षेत्र में विपुल लक्ष्मी तथा वैभव प्राप्त करेगा। इसके विपरीत व्यक्ति यदि सामाजिक क्षेत्र चुनता है तो यहां भी ऎसा व्यक्ति क्रांतिकारी परिवर्तन ला देगा कि समाज उसे युगों तक याद करेगा वह जनसहयोग भी प्राप्त करेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि ऎसा व्यक्ति जिस भी क्षेत्र को अपनायेगा उसमें सफलता प्राप्त करेगा। जिस व्यक्ति के हाथ में सूर्य रेखा चंद्र क्षेत्र से आरम्भ होती है उसका भाग्योदय तो होता है परंतु उसकी उन्नति उसकी स्वयं की मेहनत का फल नहीं होती। यहां व्यक्ति सदैव दूसरों के आश्रय पर ही उन्नति करता है। जिस प्रकार चंद्रमा स्वयं सूर्य से प्रकाश ग्रहण कर प्रकाशित होते हंै इसी प्रकार सूर्य रेखा के इस स्थान से उद्गम होने वाले व्यक्ति का आचरण होता है वह सदा दूसरों के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है। उस व्यक्ति की उन्नति का मार्ग दूसरों की इच्छा पर निर्भर होता है, दूसरों की इच्छा से ही ऎसे व्यक्ति की उन्नति का मार्ग अग्रसर होता है। यदि ऎसे व्यक्ति को अच्छा परामर्श या पथ-प्रदर्शन की सहायता नहीं मिले तो ऎसे व्यक्ति के उ”ावल भविष्य की कामना करना बेमानी होगी। यदि परामर्श मिल गया तो उन्नति कर सकता है। ऎसे व्यक्ति की उन्नति होती है परंतु शर्त है कि किसी न किसी रूप में पराश्रित होकर होती है परंतु कैसी भी स्थिति हो ऎसे व्यक्ति को परामर्शदाता व सहायता मिल ही जाती है। फिर भी जिस व्यक्ति का भाग्योदय दूसरे की सहायता पर निर्भर हो उसे अति उत्तम नहीं कहा जा सकता परंतु व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उन्नति कैसे भी हो चाहे सहायता से हो उन्नति तो उन्नति ही है।

 
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